Saturday, May 17, 2008

आप भी सफल लेख लिख सकते हैं!

आप कोई ज्ञानवर्धक एवं रोचक लेख लिखने की अभिलाषा रखते हैं किन्तु यह भी सोचते हैं कि शायद यह कार्य मरे लिये संभव नहीं हो पायेगा। यदि आपने पहले कभी कोई लेख नहीं लिखा है तो आपका ऐसा सोचना स्वाभाविक है।
किंतु मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ऐसा बिल्कुल ही नहीं है - आप अवश्य ही बहुत अच्छा लेख लिख सकते हैं।
क्या आपको विश्‍वास नहीं हो रहा है?
तो इस लेख को पूरा पढ़ जाइये, पढ़ने के बाद आपको स्वयं लगने लगेगा कि आपका अपने विषय में मिथ्या धारणा है वह चटक कर टूटने लगी है।
सबसे पहले तो आप दूसरों के द्वारा लिखे गये लेखों, कहानियों आदि को, जितना भी अधिक हो सकता है, पढ़िये। जितना अधिक आप पढ़ेंगे, उतना ही अधिक आप सीखेंगे भी।
बच्चों के लिये लिखी गई कहानियाँ पढ़ने से शुरू कीजिये। इन कहानियों से आपकी कल्पनाशीलता में वृद्धि होगी। कुछ रचनात्मकता भी आपमें जागृत होगी।
पढ़िये.....सीखिये.....लिखिये..... पढ़िये.....सीखिये.....लिखिये..... पढ़िये.....सीखिये.....लिखिये.....
यह एक अन्तहीन प्रक्रिया है।
आपको इंटरनेट में इस जैसे और भी लेख मिलेंगे जो कि लेख लिखने के विषय में जानकारी देते हैं। उन्हें भी खोज-खोज कर पढ़िये।
इस प्रकार से पढ़ते रहने तथा समय-समय पर लिखते रहने का अभ्यास करने से आपमें अच्छे लेख लिखने की क्षमता का विकास होना आरम्भ हो जायेगा। याद रखिये रहीम कवि ने भी कहा है -
करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात ते, सिल पर पड़त निसान॥
हाँ तो कुछ अभ्यास हो जाने के बाद अपना एक चिट्ठा शुरू कर दीजिये (गँठजोड़ में चिट्ठा लिखने की सुविधा का भरपूर उपयोग कीजिये) और नियमित रूप से उसमें लिखते रहिये। इस प्रकार से लिखना आपके लिये आसान से आसानतर होता जायेगा।
अपने दिमाग से इस भय को निकाल फेंकिये कि आप अच्छा लेख नहीं लिख सकते या आपके लेख को कोई पसंद नहीं करेगा। यदि आप अपने चिट्ठे में स्टेटकाउंटर लगा देंगे तो आपको स्वयं ही पता चल जायेगा कि आपके चिट्ठे को पढ़ने वालों की संख्या में दिनोदिन वृद्धि होती जा रही है। इस तरह से आपका मनोबल भी बढ़ता जायेगा।
निम्न लिखित बातों पर ध्यान रखने से आपके लेख की गुणवत्ता बढ़ेगीः
छोटे वाक्यों तथा परिच्छेदों (paragraphs) का प्रयोग करें। जिन बातों को आप अधिक महत्व देना चाहते हैं उन्हें बड़े तथा उभरे हुये अक्षरों में प्रदर्शित करें। सरल भाषा का प्रयोग करें। बड़े-बड़े तथा कठिन शब्दों से बचने की कोशिश कीजिये। दिमाग से भय तथा निराशा को निकाल फेंकिये। आत्मविश्‍वास बनाये रखिये।
याद रखिये आप अवश्य ही सफल होंगे। हो सकता है कि शुरू-शुरू के कुछ दिनों में आपको कुछ निराशा मिले किन्तु कभी भी निराश होकर लिखना मत छोड़िये।
इसके साथ ही साथ दूसरों के द्वारा लिखे गये लेखों का अधिक से अधिक अध्ययन कीजिये। इस बात को ध्यान दीजिये कि मैं पढ़ने के लिये नहीं कह रहा हूँ बल्कि अध्ययन करने के लिये कह रहा हूँ। अध्ययन में पढ़ने के अलावा उसे समझना तथा उस पर मनन और चिंतन करना भी शामिल होता है। गौर से सोचिये कि उन लेखकों ने अपना लेख शुरू कैसे किया है, अपने विचारों को प्रस्तुत करने का उनका तरीका क्या है, किस प्रकार की भाषा का उपयोग वे करते हैं, आदि-आदि।
हाँ, तो जितना अधिक आप अध्ययन करेंगे, उतना ही अधिक आप लेख लिखने के विषय में सीखते जायेंगे।
सदैव सरल, लोगों कों आसानी से समझ आने वाले तथा बोलचाल की भाषा वाले शब्दों का प्रयोग कीजिये।
मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं!

जी.के. अवधिया के हिन्दी वेबसाइट का अवलोकन करें!
Article Source: http://kriti.agoodplace4all.com

No comments: